पेनिट्रेशन साबित नहीं, तो ‘रेप’ नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले से बढ़ी बहस छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धमतरी के एक पुराने मामले में कहा है कि यदि किसी घटना में पूरा पेनिट्रेशन यानी जननांग का अंदर प्रवेश साबित नहीं होता और सिर्फ रगड़ या संपर्क हुआ है, तो कानून की नजर में इसे बलात्कार नहीं बल्कि बलात्कार का प्रयास माना जाएगा। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने मेडिकल रिपोर्ट और गवाहियों के आधार पर माना कि आरोपी की मंशा गलत थी, लेकिन पूर्ण पेनिट्रेशन सिद्ध नहीं हुआ, इसलिए सजा 7 साल से घटाकर 3 साल कर दी गई। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि मेडिकल सबूतों में जबरन संबंध की स्पष्ट पुष्टि नहीं है और पीड़िता के बयानों में विरोधाभास हैं, जबकि राज्य पक्ष ने कपड़ों पर मिले मानव शुक्राणु और निजी