
देश में 1.52 लाख लोग कचरा बीनने का काम करते हैं, 60% से ज्यादा दलित समुदाय से, संसद में जारी हुआ डाटा
केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने ‘नमस्ते’ योजना के तहत पहली बार देशभर में कचरा बीनने वालों की गणना कर संसद में डेटा पेश किया है। 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शहरी क्षेत्रों में कुल 1.52 लाख लोग कचरा बीनकर जीविका चला रहे हैं। इनमें 60.3% अनुसूचित जाति (SC), 13.7% ओबीसी, 10.5% एसटी और 10.7% सामान्य वर्ग से हैं। महिलाओं (48.7%) और पुरुषों (51.3%) की संख्या लगभग बराबर है। दिल्ली, गोवा और अंडमान-निकोबार में सामान्य वर्ग के कचरा बीनने वालों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाई गई। इस सर्वे का उद्देश्य इन लोगों की औपचारिक पहचान कर उन्हें सुरक्षा उपकरण और सरकारी योजनाओं का लाभ देना है, क्योंकि 2014 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान 859 लोगों की मौत हो चुकी है। सरकार ने लगभग 89 हजार सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारियों की भी पहचान की है, जिनमें ज्यादातर वंचित वर्गों से आते हैं।









