
मार्च–मई में बारिश का नया ट्रेंड बदलते विक्षोभ बढ़ा रहे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा
आईआईटी रुड़की के एक नए अध्ययन में पता चला है कि पश्चिमी विक्षोभ, जो पहले मुख्य रूप से सर्दियों में हिमपात और बारिश लाते थे, अब प्री-मानसून महीनों (मार्च–मई) में भी ज्यादा सक्रिय हो रहे हैं। ये सिस्टम अब लंबी दूरी तय कर रहे हैं, रास्ते में अधिक नमी जुटा रहे हैं और तेज ऊपरी हवाओं के साथ उत्तर भारत तक पहुंच रहे हैं, जिससे असामान्य और तेज बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं। सात दशक से अधिक के आंकड़ों के विश्लेषण में पाया गया कि जलवायु ऊष्मायन इन मौसम प्रणालियों के समय, संरचना और प्रभाव को बदल रहा है। इसका असर हिमालयी राज्यों में अचानक बाढ़, भूस्खलन और जल संकट के रूप में दिख सकता है, जैसा कि 2023 हिमाचल और 2025 उत्तराखंड की बाढ़ में देखने को मिला। शोधकर्ताओं ने चेताया है कि बदलते मौसम पैटर्न को देखते हुए जलवायु मॉडल, पूर्वानुमान प्रणाली और आपदा प्रबंधन रणनीतियों की तुरंत समीक्षा जरूरी है, ताकि संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में जीवन, आजीविका और जल संसाधनों की बेहतर सुरक्षा की जा सके।









