
शमशान से मृतक की आत्मा को लाकर मिलाते हैं पूर्वजों से, CG के आदिवासी निभाते हैं ये अनोखी परंपरा !
राजनांदगांव जिले के औंधी क्षेत्र के ग्राम पालेभट्टी में आदिवासी समाज आज भी सदियों पुरानी परंपराओं को पूरी आस्था और अनुशासन के साथ निभा रहा है।
किरंगे परिवार ने हाल ही में ‘मठ बांधना’ और ‘कड़साल’ नामक पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न किया।
मान्यता के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा को सीधे विदा नहीं किया जाता, बल्कि विधि-विधान से उसे पूर्वजों में शामिल किया जाता है।
श्मशान से मांदर और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ आत्मा को प्रतीकात्मक रूप से गांव लाया जाता है।
रास्ते में पूर्वजों की आत्माओं से ‘भेंट’ कराने की रस्म निभाई जाती है, जिसे जीवन और मृत्यु के बीच सेतु माना जाता है।
घर पहुंचकर आंगन में ‘मठ’ बांधा जाता है, जहां पूजा कर आत्मा को पूर्वजों की श्रेणी में स्थान दिया जाता है।
इस अनुष्ठान में परिवार के 16 दिवंगत सदस्यों की आत्माओं को सामूहिक रूप से सम्मान दिया गया।
अविवाहित बेटी की आत्मा को परंपरा के अनुसार अलग स्थान पर सम्मानपूर्वक स्थापित किया गया।
अनुष्ठान के बाद ‘कड़साल’ कार्यक्रम हुआ, जिसमें रातभर पारंपरिक नृत्य और गीतों के माध्यम से पूर्वजों का स्मरण किया गया।
यह परंपरा सामाजिक एकता, पूर्वजों के सम्मान और नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है।








